शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011
बुधवार, 20 अप्रैल 2011
राजकुमार साहू के ब्लॉग से :हरियाली की रखवाली मां के हाथ में
हरियाली की रखवाली मां के हाथ में
जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम पहरिया के पहाड़ में मां अन्नधरी दाई विराजित हैं। करीब 30 एकड़ क्षेत्र में फैल इस पहाड़ में हजारों इमारती पेड़ है, जिसे लोगों के द्वारा नहीं काटा जाता। पहाड़ में लकड़ियां पड़ी रहती हैं और दीमक का निवाला बनती है, मगर लकड़ियों को उपयोग के लिए कोई नहीं ले जाता। यह भी लोगों के बीच धारणा है कि जो भी मां अन्नधरी दाई के पहाड़ पर स्थित इमारती लकड़ी को घर लेकर गया, उस पर मां की कृपा नहीं होती और उस पर दुखों का पहाड़ टूट जाता है। उसे और उसके परिवार पर आफत आ जाती है। यही कारण है कि पहाड़ पर लकड़ियां सड़ती-गलती रह जाती हैं, लेकिन उसे कोई हाथ नहीं लगाता। इस तरह मां ही हरियाली की रखवाली करती हैं और यह पर्यावरण संरक्षण की दिषा में सार्थक पहल हो रही है। साथ ही इससे समाज में भी संदेष जाता है, क्योंकि आज की स्थिति में जिस तरह जंगल काटे जा रहे हैं, वहीं पहरिया में जो लोगों के मन भावना है, उससे निष्चित ही पर्यावरण संरक्षण की दिषा में कार्य जरूर हो रहा है। जिला मुख्यालय जांजगीर से 20 किमी तथा बलौदा विकासखंड से ग्राम पहरिया की दूरी करीब 10 किमी है। पहरिया, चारों ओर से पहाड़ों और हरियाली से घिरा हुआ है, लेकिन मां अन्नधरी दाई जिस पहाड़ में स्थित है, वह जमीन तल से काफी उपर है। करीब 100 फीट उपर पहाड़ पर हजारों की संख्या में छोटे-बड़े इमारती पेड़ हैं, जिससे हरियाली तो फैली हुई है। साथ ही पेड़ों की कटाई नहीं होने से पर्यावरण संरक्षण में यह सार्थक साबित हो रहा है। यही कारण है कि पहरिया समेत इलाके के लोगों में मां अन्नधरी दाई के प्रति असीम श्रद्धा है और साल के दोनों नवरात्रि में यहां ज्योति कलष प्रज्जवलित भक्तों द्वारा कराए जाते हैं। इसके अलावा मां की महिमा के बखान सुनकर दूर-दूर से लोग पहाड़ीवाली मां अन्नधरी दाई के दर्षन के लिए पहुंचते हैं। ग्राम पहरिया के दरोगा राम का कहना है कि लोगों में मां के प्रति आस्था की जो भावना है और पेड़ों के संरक्षण के प्रति जो लोगों में जागरूकता बरसों से कायम है, वह निष्चित ही समाज के अन्य लोगों के लिए एक अच्छा संदेष ही माना जा सकता है, क्योंकि जहां जंगल दिनों-दि कट रहे हैं और पर्यावरण के हालात बिगड़ रहे हैं, वहीं ग्राम पहरिया में मां अन्नधरी की महिमा की खाति जो परिपाटी चल रही है, वह काबिले तारीफ है और इसे अन्य लोगों को भी आत्मसात करने की जरूरत है। यदि इस तरह पहल अन्य जगहों में होने लगे तो वह दिन दूर नहीं, जब पेड़ों की अंधा-धुंध कटाई में कमी जरूर आ जाएगी। अंत में मां अन्नधरी दाई को प्रणाम और लोगों की आस्था को सलाम। निष्चित ही यह समाज के लिए प्रेरणादायी अवसर है।जिंदगीनामा the life style : राजकुमार साहू के ब्लॉग से
कचरा बाई : हौसले का एक नाम

महज ढाई फीट कद होने के बावजूद चाम्पा की कचरा बाई का हौसला देख कोई भी एकबारगी सोचने पर विवश हो जायेगा। यह कहना गलत नहीं होगा कि कचरा बाई, हौसले का एक नाम है। एम्ए राजनीति में शिक्षा लेने वाली कचरा बाई हर किसी से जुदा लगती है, क्योंकि उसका कद ढाई फीट है। कुदरत ने कचरा बाई को भले ही कद काठी कम दिया हो, लेकिन उसके हौसले की उड़ान के आगे यह कमजोरी नहीं बन सकी। उसने कंप्यूटर की भी शिक्षा लेकार यह साबित कर दिया है कि जहाँ चाह होती है। वहां राह खुद बन जाती है। लोगों के बीच कचरा बाई को जैसा सम्मान मिलना चाहिए, बचपन से उसके कद के नसीब नहीं हो सका । हालांकि अब वह समय बीत चूका है और वाही लोग कचरा बाई कि क़ाबलियत कि तारीफ करते नहीं थकते।चाम्पा के नयापारा की रहने वाली कचरा बाई के परिवार में माता-पिता के अलावा एक भाई और तीन बहने हैं। उसका पिता और मां बीमार रहती है। इस तरह वह और उसका छोटा भाई रामचरण जैसे-तैसे परिवार कि गाड़ी को खिंच रहे हैं। कचरा बाई ने कई बार मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को रायपुर जाकर जनदर्शन कार्यक्रम में अपनी योग्यता और समस्या के बारे में बता चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने लिखित में भी उसे उसकी योग्यता के लिहाज से शिक्षाकर्मी बनाने जांजगीर-चाम्पा जिले के अफसरों को निर्देश दिए हैं, लेकिन जिले के अधिकारी हैं कि नियमों की दुहाई देकर उसे नौकरी सेने बच रहे हैं। कचरा बाई ने ना जाने कितनी बार राजधानी रायपुर और जांजगीर कलेक्टोरेट के चक्कर कटी है। अभी हाल ही में कचरा बाई जनदर्शन कार्यक्रम में जाकर मुख्यमंत्री से फिर मिली, एक बार उसे और दिलासा दिलाया गया है की उसे जल्द ही नौकरी मिल जाएगी।
कचरा बाई ने नौकरी पाने की वह योग्यता हासिल की है, जिसके बदौलत उसके परिवार जीने का सहारा मिल जायेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। जिस हौसले के साथ वह जीवन पथ पर आगे बढ़ रही है, इसमें शासन स्टार पर सहयोग की जरुरत उसे है, मगर लालफीताशाही के आगे उसका कुछ बस नहीं चल रहा है। हालांकि जिले के कलेक्टर ब्रजेश चन्द्र मिश्रा ने कचरा बाई की समस्या को देखते हुए कलेक्टोरेट में ही कोई नौकरी देने का उसे दिलासा दिया है। अब देखना होगा की जो ढाई फीट का कद रख कर समाज को सन्देश का कार्य करने वाली कचरा बाई के हित में कुछ होता है की नहीं।
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